[गोवंश रक्षा] बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना यूपी|

यूपी बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना

यूपी बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना| उत्तर प्रदेश बेसहारा गोवंश सहभागिता स्कीम 2021|मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना|up Mukhyamantri Nirashrit Beshara Govansh Sahbhagita Yojana|Nirashrit Beshara Govansh Sahbhagita scheme|

उत्तर प्रदेश मैं अपने कैबिनेट मीटिंग में नई योजना शुभारंभ किया है| यह ‘माननीय मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के नाम से जानी जाएगी।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने बेसहारा आवारा पशुओं का पालन करने वाले किसानों वित्तीय सहायता देने की शुरुआत की है| जैसा कि आप जानते हैं दिन-प्रतिदिन आवारा पशुओं छोड़ा जा रहा है| इसको देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  Nirashrit Beshara Govansh Sahbhagita Yojana गठन किया है| उत्तर प्रदेश बेसहारा गोवंश सहभागिता स्कीम 2022 से आवारा पशुओं को छोड़ा नहीं जाए|

यूपी सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण व भरण पोषण के लिए स्थायी-अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल, गो संरक्षण केंद्र, गोवंश वन्य विहार, पशु आश्रय गृह संचालित कर रही है। 2012 की पशुगणना के मुताबिक प्रदेश में 205.66 लाख गोवंश हैं। इनमें 10-12 लाख निराश्रित गोवंश हैं।Nirashrit Beshara Govansh Sahbhagita scheme पर अनुमानित एक अरब नौ करोड़ 50 लाख रुपये खर्च होंगे।यूपी बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना

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यूपी मुख्यमंत्री शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना|UP Internship Scheme 2022

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना|यूपी शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना 2022|UP Internship yojana 2022|मुख्यमंत्री शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना|इंटर्नशिप योजना 2022|यूपी इंटर्नशिप योजना 2022|up Mukhyamantri shishikshu protsahan yojana|

आज हम यूपी मुख्यमंत्री शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना जानकारी साझा करेंगे|उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी यूपी इंटर्नशिप योजना 2022 ने योजना की शुरुआत की है| उत्तर प्रदेश में बहुत से युवा बेरोजगार हैं उन बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए इस योजना चलाया गया है|मुख्यमंत्री शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना’ के तहत पहले चरण में 35 हजार युवाओं को निजी संस्थानों में काम सीखने का मौका मिलेगा। काम सीखने के बाद सरकार निजी संस्थानों में शिशिक्षुओं (इंटर्न) को नौकरी दिलाने के भी प्रयास करेगी। काम सीखने के दौरान शिशिक्षु को 2500 रुपये महीने मिलेंगे।

इसमें 1500 रुपये केंद्र व एक हजार रुपये राज्य सरकार देगी।सरकार को शिशिक्षुओं को अपने हिस्से की अप्रेन्टिसशिप एक हजार रुपये देने में इस साल 63 करोड़ रुपये खर्च होंगे। व्यवसायिक शिक्षा विभाग ने राज्य सरकार से 63 करोड़ रुपये मांगे हैं। व्यवसायिक शिक्षा विभाग ने सरकार को ‘मुख्यमंत्री शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना’ का पूरा खाका खींचकर भेजा है। विभाग ने यह भी बताया कि शिशिक्षु अधिनियम के तहत सरकारी, सहकारी, निगम व निजी उद्योग अपने यहां कुल कार्मिकों की संख्या का ढाई से 15 फीसदी तक अप्रेन्टिसशिप के तहत युवाओं को काम सीखने का मौका देते हैं।

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